Waste Management

अपशिष्ट प्रबंधन का सीधा संबंध हमारे प्रकृति वह पर्यावरण से है समूचा देश चाहे वो विकसित हो या विकासशील या फिर अविकसित हो अपशिष्ट प्रवर्धन के प्रति संवेदनशील व जिम्मेदार बन रहा है यहां तक कि कुछ देश अपशिष्ट प्रबंधन श्रृंखला का सफल प्रयोग कर चुके हैं जबकि कुछ देश अभी इसकी तैयारी में जुटे हुए हैं
अपशिष्ट प्रबंधन से यह अभिप्राय होता है कि मानव जीवन में उपयोग में लाए जाने वाली वस्तुओं से जो अनुपयोगी समान बच जाता है उसका उपयोग हम प्रकृति के हित में किस प्रकार कर सकते हैं , जिससे कि अवाँछनीय पदार्थों का उपयोग भी हो जाए और वह हमारे प्रकृति को हानि भी ना पहुंचाएं ।

अपशिष्ट प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया हमारे पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित करने की है अपशिष्ट के कई रूप होते हैं जैसे ठोस, गैस या तरल और प्रत्येक में निपटारे और प्रबंधन की अलग-अलग प्रक्रिया होती है। भारत एक विशाल देश है जिसमे कई गाँव और कई शहर आते हैं। आजकल गाँव के अधिकतम लोग शहर के तरफ तेजी से आकर्षित होते हैं शहरों में आज दुनिया की करीब आधी आबादी बसती है । और ये कहना गलत नही होगा की कुल कचरा का अधिकतम हिस्सा शहर से ही उतपन्न होता हैं और समय के साथ साथ यह बढ़ता ही रहेगा। शहर में जीवन यापन करना आज के मनुष्य के समस्त मुलभुत जरूरतों मे से एक हो गया है। क्योकि हम बढ़ती जनसँख्या या फिर शहरी आबादी को रोक नही सकते इसलिए हमें उनके द्वारा उपयोग में लाये जाने वाली वस्तुवों से बचे अपप्सिष्ठ पदार्थो का प्रबंधन उचित तरीके से कर के प्रकृति व पर्यावरण को संरछित करना होगा।
अपशिष्ठ प्रवर्धन का वास्तव मे बहुत महत्व है जहाँ एक तरफ हम अपना जीवन सुचारू रूप से जी सकते
वही हम अपने जीवन को सुरछित भी रख सकते हैं

कचरा प्रबंधन के लिए सबसे जरूरी यह है कि हम खुद भी जागरूक हों और दूसरों को भी जागरूक करें और अपशिष्ट प्रबंधन का महत्व खुद भी समंझे और औरों को भी समझाएं जिससे कि कचरा को और अपशिष्ट पदार्थों को रिसाइकल किया जा सके किया जा सके तथा उसका पुनः उपयोग किया जा सके
अगर हम कचरा प्रबंधन में सुनियोजित व समायोजित तरीके से अपने क्रियाकलापों को करने में असफल होते हैं तो निश्चित ही भविष्य में यह एक विकट समस्या होगी जहां एक तरफ प्रकृति दूषित होगी वंही दूसरी तरफ हमारे स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ेगा |

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