State of plastic waste in India

 

प्लास्टिक एक ऐसा पदार्थ है जिसे विभिन्न आकारों में डाला जा सकता है, अब क्योंकि इसे बहुत से आकारों में ढाला जा सकता है इसलिए अधिकतर वस्तुओं के निर्माण में इसका उपयोग किया जाता है । लेकिन वर्तमान में प्लास्टिक पूरी दुनिया के लिए एक विकट समस्या बन चुका है।
प्रायः हम प्लास्टिक व उनसे बने वस्तुओं का उपयोग तो कर लेते हैं , लेकिन उपयोग के बाद बचा प्लास्टिक पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र को बहुत बुरा प्रभाव डालता है । प्लास्टिक प्रदूषण कितना खतरनाक है इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि सालों साल मिट्टी में दबे रहने पर यह जैसे का वैसा पड़ा रहता है। इसे पानी भी नहीं गला सकती है और यदि इसे जलाया जाए तो हवा में प्रदूषण होगा यह पानी को जमीन में अंदर जाने से भी रोकता है । वर्तमान में भारत में प्लास्टिक प्रदूषण एक विकट समस्या है यहां पुनःचक्रण की बात तो दूर उसके सही कलेक्शन व रखरखाव की व्यवस्था भी नहीं है। यही वजह है कि हमें हर जगह प्लास्टिक कचरा किसी न किसी रूप में देखने को मिल ही जाता है। आंकड़ो की तरफ देखें तो ”केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड” के आंकड़ों के अनुसार देश में प्रतिदिन लगभग 26000 टन प्लास्टिक कचरा निकलता है। वही “वर्ल्ड इकोनामिक फोरम” का माने तो भारत में सालाना 56 लाख टन प्लास्टिक पैदा होता है। दुनिया का 60 प्रतिशत कूड़ा भारत समुद्रों में डंप करता है। भारत में प्लास्टिक प्रदूषण बढ़ रहा है क्योंकि उपभोक्ता की तादाद बढ़ रही है। यह कम लागत में तैयार हो जाता है और इसका इस्तेमाल सरल और सुविधाजनक होता है। क्योंकि एक प्रयोग के बाद अधिकांश बोतल व पॉलीथिन फेंक दिए जाते हैं, इसलिए यह कचरा बन जाता है। इसका दुष्प्रभाव यह पड़ता है कि पीने का पानी , भोजन, हवा आदि दूषित हो कर हमारे स्वास्थ्य को खराब करता है। समुद्रो में प्लास्टिक डंप करने से लाखो समुंद्री जिव की मृत्युं हो जाती हैं ।
इससे बचाव के लिए मुख्यतः एकल उपयोग प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाना होगा तथा कानूनी प्रक्रिया का पालन करके वह पालन करवा के उत्पादित प्लास्टिक को पुनर्चक्रण किया जाए और उपरोक्त नियमो का पालन करने पर ही उत्पादकों को उत्पादन का अधिकार दिया जाए।

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