Oil spill in Mauritius and its effect

समूचे विश्व में ईंधन का आयात-निर्यात का अधिकतम भाग समुद्री मार्ग से होकर जाता है। भारत में कच्चे तेल का आयात 70 प्रतिशत समुद्री मार्ग से होता है। समुद्री मार्ग से तेल के आयात और निर्यात होने पर हमेशा समुद्र में तेल रिसाव का खतरा बना रहता है। प्रायः यह घटना खराब मौसम, कोई बड़ा तूफान, या फिर भूकंप या, फिर किसी मानवीय लापरवाही का नतीजा होता है। अभी हाल में ही एक मारीशस की घटना सामने आई है, जिसमें ‘ब्लू मरीन पार्क’ के पास एक जापानी मालवाहक जहाज ”एमवी वाकाशियो” नाम का जहाज जो ईंधन तेल लेकर जा रहा था, टक्कर की वजह से दो भागों में विभक्त हो गया। ऐसा माना जा रहा है कि इसमें पहले से ही रिसाव हो रहा था और टक्कर के फल स्वरुप तक़रीबन 1000 टन से भी अधिक तेल हिन्दमहासागर मे फैल गया है। हालाकि यह उतना बड़ा तेल रिसाव नहीं था इस से भी बड़े विश्व में तेल रिसाव हो चुके हैं। लेकिन गौर करने वाली बात यह है की जहां पर हुआ वह पर्यावरण की दृष्टि से बहुत ही संवेदनशील क्षेत्र हैं। रिसाव हुऐ जहाज में कुल 3800 टन ईंधन एवं 2000टन डीजल था।और यह तेल रिसाव ब्लू वे समुद्री पार्क के पास एक संरक्षित क्षेत्र ‘पोंते डायसनी’ मे हुआ। बता दें कि कि ब्लू बे मरीन पार्क जहाँ ये घटना हुई वह एक रिजर्व है पार्क हैं। यह अंतरराष्ट्रीय महत्व का वेटलैंड(Wetland) है। जहां कई प्रजातियों के समुद्री जीव और पौधे हैं ।भले ही तेल रिसाव बहुत दूर तो नहीं हुआ है लेकिन ऐसी जगह हुआ है जिससे पर्यावरण पर संभावित गंभीर असर को लेकर चिंताएं बढ़ी है।
इस घटना की गंभीरता को इस बात से समझा जा सकता है कि जहाज से हुए नुकसान के करीब 2 हफ्ते बाद 7 अगस्त को मॉरीशस सरकार ने इस घटना को राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया। मॉरीशस में जैव विविधता की भरमार है। तरह तरह के समुंद्री जीव और पौधे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि- यंहाँ हवा और पानी की लहरों से कोई मदद नहीं मिल रही है। बल्कि ये तेल को उस इलाकों की तरफ धकेल रहे हैं। जहां महत्वपूर्ण समुद्री इको सिस्टम है।
मारिसस तेल रिसाव की वजह से समुद्री जीव और पौधों को बहुत नुकसान होगा। इससे सजीवों पर दीर्घकालिक असर पड़ेगा। उनकी प्रजनन करने की क्षमता पर असर पड़ेगा, ग्रोथ कम हो जायेगी, वही जीवो को घाव पड़ सकता हैं,और बीमारी हो सकती है। इससे समुंद्री सिप बिल्कुल खराब हो जायेंगे।
पशु पक्षियों में हाइपोथर्मिया नामक बीमारी होगी जिससे उनकी मृत्यु भी हो सकती हैं। इसके परिणाम बहुत दूरगामी होंगे। मौजूदा सरकार को चाहिए की वह तुरंत ठोस और मजबूत कदम उठाये जिससे, जीवो को होने वाली हानि कम से कम हों।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *