अलस्टोनिया : ‘ स्कोलारिस ‘ या ‘ शैतान ‘

प्रकृति ने हमेशा ही अपने रहस्य से हमें चौंकाया है। हम हमेशा से ही जानते थे कि वृक्षों का लगाया जाना सभी प्राणियों के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है। परंतु इस तथ्य को एक हद तक चुनौती देता है एक वृक्ष जिसका प्रचलित नाम है ‘ छितवन ‘। मेरी इस वृक्ष से पहली मुलाकात हुई काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रांगण में। सितंबर – अक्टूबर का महीना था। वर्ष का यह समय सुगंध बिखेरने वाले पुष्पों के लिए बेहद खास होता है। इसी समय हरसिंगार फूलते हैं, इसी समय मालती में अपूर्व निखार आता है और इसी समय छितवन भी आसपास के इलाकों को अपनी आगोश में ले लेता है।

छितवन को भारत में ‘ सप्तपर्णा ‘ के नाम से भी जाना जाता है। इसमें गजब के औषधीय गुण होते हैं। आयुर्वेद तो इसकी तारीफ करते नहीं थकता है। साथ ही यह बंगाल का राजकीय वृक्ष भी है। गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने अपने विश्वभारती विश्वविद्यालय में इसे विद्वता का प्रतीक बनाया है। विश्वभारती में यह परंपरा है कि वहां के कुलपति, जो कि सदैव भारत के प्रधानमंत्री ही होते हैं, के द्वारा स्नातक एवं स्नातकोत्तर के विद्यार्थियों को दीक्षांत समारोह में सप्तपर्णा के पत्र जी गुच्छ उनकी विद्वता के सम्मान स्वरूप भेंट किए जाते हैं।

पश्चिमी देशों में इसे ‘ अल्स्टोनिया ‘ नाम से जाना जाता है। यह नाम प्रसिद्ध वनस्पतिशास्त्री रॉबर्ट ब्राउन के द्वारा एडिनबर्ग के प्रोफेसर चार्ल्स एल्स्टन के सम्मान में सन 1811 में दिया गया था।

भारत में छितवन के और भी नाम प्रचलित हैं। गांव में मान्यता है कि छितवन के नीचे बैठने से गर्भवती स्त्रियों का गर्भपात हो जाता है। इसलिए इसे ‘ शैतान का पेड़ ‘ या ‘ छातिम का पेड़ ‘ भी कहते हैं। इस पर चिड़िया घोंसला तक नहीं बनाती है। दरअसल बसंत एवं शरद ऋतु में इस पौधे पर फूल आते हैं। पुष्पित होने के बाद यह वृक्ष अपने आसपास के विस्तृत इलाके में अपने पराग कण फैला देता है। इसके साथ ही इलाके में तेज मीठी – तीखी सुगंध फैल जाती है। इसकी सुगंध बहुत ही आकर्षक होती है। इससे नुकसान यह है कि इसके पराग कणों से अस्थमा, सर्दी – खांसी, एलर्जी आदि हो सकते हैं। मलेरिया, डायरिया, बुखार आदि में अपने औषधीय गुणों से चमत्कृत कर देने वाला यह वृक्ष अस्थमा जैसी बीमारी का कारण भी हो सकता है। लेकिन परेशान न हों अगर आप इसके सुगंध को पसंद करते हैं तो मैं यह बात आपको बता दूं कि वैज्ञानिकों का कहना है कि उद्यान में यदि एक से दो अल्स्टोनिया लगा है तो इससे हमारे स्वास्थ्य पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा हमें केवल यह ध्यान रखना चाहिए कि यह वृक्ष हमारे आसपास अधिक संख्या में उपस्थित न हो।

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